Thursday, 1 October 2009

क्या गाँधी जी नफरत के लायक है .?

ये एक सवाल ...हम सब लोगो से ॥ कल मुझे एक इनविटेशन मिला ग्रुप का ..... उसका टाइटल इंग्लिश में था ।
आई  हेट गाँधी .... गाँधी जी .... एक नाम एक सोच ... एक ताकत ... एक आदर्श .उनके लिए ऐसी कम्युनिटी ...नफरत ... ?
हो सकता है ॥ वो नफरत के काबिल ही हो । जो बंद वकालत पढ़ के आया । वो भी किसी और देश से उसका मतलब वो अच्छा खासा खानदानी इन्सान होगा । सिर्फ़ ट्रेन से धक्का लगाने से अगर आप दुसरे के बारे में सोच ने लगते तो । हमारे यहाँ हझारो लोग होते । जो महान होते ....
एक कहानी उसी समय की बात है । एक साधू । को हिंदुस्तान में ही । ट्रेन से उतर दिया था । क्यो की वहा हिन्दुस्तानी । को प्रवेश नही था । उस साधू ने अपनी योग साधना से ट्रेन को रोक लिया था और सब के माफ़ी मांगने पर ... वो ट्रेन चली थी ।
गाँधी जी के पास वो ताकत नही थी । जब साउथ अफ्रीका में ट्रेन से उतरा गया या फेंका गया । क्या गाँधी जी पहले और आखरी इंसान थे ? नही लेकिन एक लोते  इंसान थे जिन्होंने सोचा था । के नही ये ग़लत है और किसी के साथ ये नही होना चाहिए । हो सकता है इस लिए वो नफरत के लायक है ।
एक औरत को आधे नंगे बदन देख अपने कपड़ो का त्याग करना । इस लिए वो नफरत के काबिल थे इतने बड़े आदमी होते हुए वो चाहते तो अंग्रेजो से चाहे वो मांग लेते । किंग बन जाते करोडो रूपये उस समय बना ते । नही किया ..इस लिए वो नफरत के लायक थे ।
आए दिन भूखा रहना । देश के लोगो के लिए ३०० से ज्यादा किलोमीटर चलना इतना पॉवर होते हुए भी भूखा नंगा ॥ रहना । अपने मौज शौख न रखना चाहे वो आदमी कार या बंगला देदे वो न लेना । जवाहर लाल नेहरू जेसे धन्वान आदमी को अपने जेसे रहना कहना ॥
जब ३०० की.मी। की यात्रा शुरू की तब उनके साथ ज्यादा लोग नही थे । लेकिन यात्रा जब सम्पति पे पहंची तब अंग्रेज सरकार भी हिल गई थी इतना समर्थन देख कर ... अब वो नफरत के लायक आज है ...उसका मतलब । उस टाइम का पुरा हिंदुस्तान पागल था । गाँधी जी तो अपने लिए चल रहे थे तो क्या हुआ नमक पुरे हिंदुस्तान को परेशां कर रहा था ।
और ऐसी कई और बाते जो सारा हिंदुस्तान जनता है ...
अब वो टोपिक्स जिस पे ये नफरत करने वाले लोग है ... तो थोड़े सवालो के जवाब यहाँ भी है ॥भगत सिंह को फंसी हुई वो गाँधी जी ने रोकी नही गाँधी जी चाहते तो रोक सकते थे । तो भगत सिंह जी ख़ुद जान देने तेयार हुए थे उन्हें अंग्रेज सरकार को दिखाना था । के हिंदुस्तान के लोग हस्ते हस्ते जान दे भी सकते है ... अगर गाँधीजी के हाथ में होता तो वो । किसी को भी नही मरने देते । पाकिस्तान अलग हुआ वो ॥ तो यहाँ सत्ता के लाल्चुओ ने पुरा जाल बिछाया था ... और अगर ये अलग नही होता तो हिंदुस्तान का हाल कुछ और होता उसपे बहोत सारे लोगो ने लिखा है ... कृपया पढियेगा...
३ वो मुस्लिम तरफी थे ... गाँधी जी सच्चे हिंदू थे ... जो सरे धर्म को एक सामान मानते थे ॥ और सच्चे हिंदू की तरह .किसी भी धर्म को नफ़रत नही करते थे । उन्होंने दलितों के लिए भी उतनी ही हमदर्दी दिखाई है । निचले तबक्के में रहने वाले हर उन लोगो के लिए उन्हें हम दर्दी थी । कुश्त रोगी या । अश्पृश्यता के खिलाफ थे ।
पाकिस्तान अलग हुआ उसमे जिन्हा की सत्ता लालसा ज्यादा थी । मुस्लिम लीग अपने को अलग देश में देखना कहते थे । जहा मुस्लिम राज हो । और अगर देश अलग नही हुए होते तो ॥ और ख़राब हालत होती ।
वही जिन्होंने गाँधी के लिए ये सब बातें फेलाई है वो लोग उस समय भी थे ।
इन लोगो को ये बिना कपड़े घुमने वाली गरीब औरते नही दिखाई दी । भूखे नंगे लोग नही दिखे । अश्प्रुस्यता के दलदल में दबे लोग नही दिखे । मुस्लिम लीग अलग राष्ट्र मांग रहा था ॥ और क्यो सब हुआ वो तो में नही जनता लेकिन ॥ गाँधी जी के हाथ में अगर रोकना होता तो ये हुआ हही नही होता । ये ही लोग उस समय थे जिन्होंने बात फेलाई के गाँधी जी ने ये किया वो किया
तो क्या आप लोग ने रोकने की कोशिश भी नही की । क्या ये एक या दो बात जो गाँधी जी के हाथ में नही थी । और अगर थी भी तो किसी न किसी कारन से नही रोक पाए ... कुछ तो मजबूरी रही होगी ॥ जो बंदा देश को आज़ादी दिलाने इतनी कुर्बानी दे सकता है । भूखा रह सकता है इतना पढ़ा लिखा होके । और सब कुछ ले सके उतना होके भी अगर । एक कपड़े में घूम सकता है । और अपने हर काम देश के लिए करने वाला आदमी
अगर देश अलग होते रोक सकता तो मुझे नही लगता वो होने भी देगा । जो इतनी कुर्बानी नही देगा वो भी ॥ तो गाँधी जी केसे चाहते के देश अलग हो । ये क्यो नही सोच ते ये लोग ॥
यही लोग । जो बड़े बड़े नेता बने घूमते है । देश की चिंता करते है । एक महिंद अबिना कपड़ो के घूम के दिखाए । आधे कपड़ो में किसी गरीब औरत को देख के पुरे कपड़े केसे उतारे जाए ये सोच ते है । गर्रिबो के लिए रेली या निकलते है । ३०० कीमी चलना छोडो ३ किमी भी एसी बस या कार में जायेंगे हेलेकोप्टर में जायंगे .जिन की कोई हेसियत नही है वो लोग । भूख हड़ताल करने की बात दूर .लोगो को भूखा केसे रख सके वो सोचेंगे ।
पुरी दुनिया जिसे महान इन्सान मानती है ॥ भारत के राष्ट्र पिता का जिन्हें दराज्जा मिला है । उस महान इसनान के लिए अगर आप को ज्ञान नही है । या लेना नही चाहते । अपनी सोच लगाना नही चाहते तो कृपया ग़लत दिमाग दौड़ा के एक महान इंसान के लिए नफ़रत भी न फेलाए और कीसी और को भी न फेलाने दे और जिन नेता ओ की बात सुन के आप ये दिमाग दौड़ा रहे है उन नेताओ को या संगठन के लोगो को आप देखेंगे तो वो सारे वैभव विलास में रहने वाले लोग है गाँधी जी की तरह थोड़े भी जीवन जीना चालू करेंगे ॥ तो भी कुछ उन्हें ये बोलने का हक नही है के वो गाँधी जी से नफरत करते है ।
कृपया ऐसी बातें फेलाने से पहले जान ले एक ऐसे आदमी के बारे में जिन्हों ने अपनी सारी जिंदगी बिना कीसी मतलब के .देज्श के नाम कर दी अगर उन्हें मान न दे पाए तो उनकी बेइज्जती न करे और अपनी नफरत अपने दिल में रखे लोगो न कहे । और उन से नफरत करे वो इंसान इंसानियत से भी नफरत करता होगा ॥

शरद आचार्य

1 comment:

  1. Baat nazariya ki hai...we are a society that is more prone to backstab a hero than face a villian...its just perspective to see the good and overlook the evil...after all man is born with both good and evil characteristics...who are we to hate someone..and that too this particular someone has done so much for the nation...

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